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Saturday, May 2, 2009

किसी की मुस्कुराहटों ......

दिल को छू लेने वाला अंदाज..... इस गाने को सुन और देख मेरा गाँव याद आता है .....बड़ी बेफिक्री से घुमा करते थे ..धमा चौकडी मचाते हुए..... यहाँ को राज कपूर साहब ने तो कमाल ही कर दिया ..मुकेश साहब की आवाज इनपर इतनी सटीक बैठती है की गाने को देखने और सुनने से कभी मन ही नही भरता ...
क्या अंदाज है ...टोपी पहने झोला लटकाए हुए ..गाँव की गलियों में सड़क पर गीत गाते हुए.....भिखारी से भी मांग कर खाना ...वाकई निराला अंदाज ....हाथ नमस्कार करने के अंदाज जब कपूर साहब उठाते है ...तो चेहरा इतना भोला लगता है ...भाई गाँव के छोरे का दर्शन हो जाता है .......बार- बार देखता सुनता हूँ ..हर बार कोई न कोई अर्थ निकल ही आता है ..मन ही मन गीतकार को धन्यवाद देता हूँ ..काश !आज भी ऐसे गीत बनते ......

Thursday, March 12, 2009

माझी और किनारा

मुकेश की आवाज में मुझे ''माझी नैया ढूढे किनारा गीत काफी अच्छा लगता है । अभी सुन ही रहा हूँ। मेरी जिंदगी भी एक माझी की तरह ही है ... जो लगातार किनारे की तलास कर रहा है .....अफ्शोश अभी तक नही मिला ।

खोज अभी जारी है । आशा और निराशा की किरणों ने मन को बेचैन कर दिया है । छल-छल बहती जीवन-धारा ही अब मेरा संगीत है । किसी ना किसी की खोज में है...... ये जग सारा । एक लाइन है कभी ना कभी तो समझोगे तुम ये इशारा.... मांझी का इशारा ।

॥कभी ना कभी तो मिलन होगा, तुमसे हमारा ।। मांझी नैया ........ ढूंढें किनारा ।