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Friday, January 14, 2011
Tuesday, May 12, 2009
अपना दिल तो आवारा ......
खुबसूरत गीत .... हेमंत दा की आवाज में .....
क्या मिठास है ....कालजयी रचना और संगीत ......
मन को मदहोश कर देते है .....स्कुल के दिनों की याद ताजा हो जाती है .....
क्या मिठास है ....कालजयी रचना और संगीत ......
मन को मदहोश कर देते है .....स्कुल के दिनों की याद ताजा हो जाती है .....
Tuesday, May 5, 2009
खोया खोया चाँद ......
खोया खोया चाँद .....खुला आसमान ...आंखों में सारी रात जायेगी ।
एक खुबसूरत आवाज और वो भी रफी साहब की .....मन भरता ही नही क्या करे ।
देवानंद ने गाने को अमर बना दिया है ..... शरीर तो देखिये ..कितनी बेचैनी है ।
हाव भाव कमाल के है .....बड़ी ही खूबसूरती के साथ फिल्माया गया है यह गाना ।
प्रेमिका से बिछड़ने पर जो दर्द है उस दर्द को आवाज में रफी साहब ने और
देवानंद साहब ने परदे पर बखूबी उतारा है । आप भी देखिये .......
एक खुबसूरत आवाज और वो भी रफी साहब की .....मन भरता ही नही क्या करे ।
देवानंद ने गाने को अमर बना दिया है ..... शरीर तो देखिये ..कितनी बेचैनी है ।
हाव भाव कमाल के है .....बड़ी ही खूबसूरती के साथ फिल्माया गया है यह गाना ।
प्रेमिका से बिछड़ने पर जो दर्द है उस दर्द को आवाज में रफी साहब ने और
देवानंद साहब ने परदे पर बखूबी उतारा है । आप भी देखिये .......
Saturday, May 2, 2009
किसी की मुस्कुराहटों ......
दिल को छू लेने वाला अंदाज..... इस गाने को सुन और देख मेरा गाँव याद आता है .....बड़ी बेफिक्री से घुमा करते थे ..धमा चौकडी मचाते हुए..... यहाँ को राज कपूर साहब ने तो कमाल ही कर दिया ..मुकेश साहब की आवाज इनपर इतनी सटीक बैठती है की गाने को देखने और सुनने से कभी मन ही नही भरता ...
क्या अंदाज है ...टोपी पहने झोला लटकाए हुए ..गाँव की गलियों में सड़क पर गीत गाते हुए.....भिखारी से भी मांग कर खाना ...वाकई निराला अंदाज ....हाथ नमस्कार करने के अंदाज जब कपूर साहब उठाते है ...तो चेहरा इतना भोला लगता है ...भाई गाँव के छोरे का दर्शन हो जाता है .......बार- बार देखता सुनता हूँ ..हर बार कोई न कोई अर्थ निकल ही आता है ..मन ही मन गीतकार को धन्यवाद देता हूँ ..काश !आज भी ऐसे गीत बनते ......
क्या अंदाज है ...टोपी पहने झोला लटकाए हुए ..गाँव की गलियों में सड़क पर गीत गाते हुए.....भिखारी से भी मांग कर खाना ...वाकई निराला अंदाज ....हाथ नमस्कार करने के अंदाज जब कपूर साहब उठाते है ...तो चेहरा इतना भोला लगता है ...भाई गाँव के छोरे का दर्शन हो जाता है .......बार- बार देखता सुनता हूँ ..हर बार कोई न कोई अर्थ निकल ही आता है ..मन ही मन गीतकार को धन्यवाद देता हूँ ..काश !आज भी ऐसे गीत बनते ......
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