Friday, April 17, 2009

तू गंगा की मौज ....

tu ganga ki mauj main

यह गाना जीवन दर्शन है .....

Sunday, April 12, 2009

कही दूर जब दिन ढल जाए ......

कही दूर जब दिन ढल जाए , सांझ की दुल्हन बदन चुराए ... मेरे खयालो के आँगन में सपनों का दीप जलाए ॥
यह गाना दिल को छू लेता है । जिंदगी की हकीकत को बयां करता है । मुकेश साहब की आवाज में जो दर्द देखने को मिला है ... अन्यत्र दुर्लभ है । दर्द होते हुए भी मुस्कुराना है यही तो जिंदगी का नाम है ... आप भी मजा लीजिये इस दर्द भरी दास्ताँ का ......


Wednesday, April 1, 2009

यह गाना दिल को छू जाता है .... आप भी सुनिए , रफी साहब की आवाज में ....


Tuesday, March 24, 2009

सब कुछ सिखा हमने .....

राज कपूर और नूतन .....

ये जोड़ी भी फ़िल्म इंडस्ट्री में बेमिसाल थी ... इनको देखने का अलग मजा था ... कुछ सुनिए , कुछ देखिये और फ़िर सोचिये .......

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Thursday, March 19, 2009

आदमी जो कहता है ....

जिंदगी बड़ी अजीब है । इसमे आशा और निराशा दोनों है । जब दर्द जुबान पर आता है तो चहरे की रंगत बदल जाती है । थोड़े दिनों की जिंदगी है .... इसमे किसी को क्या सताना ... क्या तडपाना ? ऐसी सोच रखनी भी चाहिए पर कोई आपको इन सब खूबियों के बाद भी सताता है तो दर्द तो बाहर आएगा ही । प्रेम में धोखा खाना तो बड़ा ही दुखदाई है । गाना बड़ा प्यारा लगता है ... किशोर दा की आवाज अपने चरम पर है ।

यह गाना मैंने पहली बार हाई स्कूल में सुना था । रेडियो पर सुना था । तबसे इसको सुनने का कोई भी मौका नही छोड़ा । किशोर दा की आवाज अमिताभ बच्चन पर काफी सटीक बैठी है ......




Sunday, March 15, 2009

जीवन से भरी तेरी आँखें

सफर फ़िल्म का यह गाना मुझे किशोर दा द्बारा गाये हुए सभी गानों में कुछ विशेष लगता है । इसमे जीवन दर्शन झलकता है । इस गाने के बोल इतने सुंदर है की बार बार सुनने को मन करता है । तस्वीर बनाए क्या कोई क्या कोई लिखे तुझपे कविता ... ये लाइन दिल को झकझोर देता है .....१९७० में यह फ़िल्म आई थी जिसका यह गाना इन्दीवर ने लिखा है और संगीत कल्याण जी आनंद जी ने दिया है ।

जीवन से भरी तेरी आँखें
मजबूर करे जीने के लिए
जीने के लिए
सागर भी तरसते रहते हैं
तेरे रूप का रस पीने के लिए
पीने के लिए
जीवन से भरी तेरी आँखें

तस्वीर बनाए क्या कोई
क्या कोई लिखे तुझ पे कविता
रंगों छंदों में समायेगी- २
किस तरह से इतनी सुन्दरता,
सुन्दरता ...
एक धड़कन है तू दिल के लिए
एक जान है तू जीने के लिए
जीने के लिए
जीवन से भरी तेरी आँखें

मधुबन की सुगंध हैं साँसों में
बाहों में कमल की कोमलता
किरणों का तेज है, चहरे पे- २
हिरणों की है, तुझ में चंचलता,
चंचलता ...
आँचल का तेरे है तार बहुत
कोई चाक जिगर सीने के लिए
सीने के लिए
जीवन से भरी तेरी आँखें
मजबूर करे जीने के लिए
जीने के लिए
जीवन से भरी तेरी आँखें..

Thursday, March 12, 2009

माझी और किनारा

मुकेश की आवाज में मुझे ''माझी नैया ढूढे किनारा गीत काफी अच्छा लगता है । अभी सुन ही रहा हूँ। मेरी जिंदगी भी एक माझी की तरह ही है ... जो लगातार किनारे की तलास कर रहा है .....अफ्शोश अभी तक नही मिला ।

खोज अभी जारी है । आशा और निराशा की किरणों ने मन को बेचैन कर दिया है । छल-छल बहती जीवन-धारा ही अब मेरा संगीत है । किसी ना किसी की खोज में है...... ये जग सारा । एक लाइन है कभी ना कभी तो समझोगे तुम ये इशारा.... मांझी का इशारा ।

॥कभी ना कभी तो मिलन होगा, तुमसे हमारा ।। मांझी नैया ........ ढूंढें किनारा ।

Monday, March 9, 2009

रात हमारी तो.....

रतिया कारी कारी रतिया
रतिया अंधियारी रतिया
रात हमारी तो
चाँद की सहेली है
कितने दिनों के बाद
आई वो अकेली है
चुप्पी की बिरह है
झींगुर का बाजे साथ

रात हमारी तो
चाँद की सहेली है
कितने दिनों के बाद
आई वो अकेली है
संझा की बाती भी कोई बुझा दे आज
अंधेरे से जी भर के करनी हैं बातें आज
अँधेरा रूठा है
अँधेरा बैठा है
गुमसुम सा कोने मैं बैठा हैं
रात हमारी तो
चाँद की सहेली है
कितने दिनों के बाद
आई वो अकेली हैं
संझा की बाती भी कोई बुझा दे आज
अंधेरे से जी भर के करनी हैं बातें आज

[अँधेरा पागल है
कितना घनेरा हैं
चुभता है, डसता है
फिर भी वो मेरा हैं] - २
उसकी ही गोदी में
सर रखके सोना हैं
उसकी ही बाहों में
चुपके से रोना है
आँखों से काजल बन
बहता अँधेरा आज
रात हमारी तो
चाँद की सहेली है
कितने दिनों के बाद
आई वो अकेली है
संझा की बाती भी कोई बुझा दे आज
अंधेरे से जी भर के करनी हैं बातें आज
अँधेरा रूठा है
अँधेरा बैठा है
गुमसुम सा,
कोने में बैठा है

यह गाना मुझे काफी अच्छा लगता है .....अँधेरा अब बुरा नही लगता ....शान्ति मिलती है । दिन के भाग दौड़ के बाद अंधेरे शुकून मिलता है ।