Sunday, April 12, 2009

कही दूर जब दिन ढल जाए ......

कही दूर जब दिन ढल जाए , सांझ की दुल्हन बदन चुराए ... मेरे खयालो के आँगन में सपनों का दीप जलाए ॥
यह गाना दिल को छू लेता है । जिंदगी की हकीकत को बयां करता है । मुकेश साहब की आवाज में जो दर्द देखने को मिला है ... अन्यत्र दुर्लभ है । दर्द होते हुए भी मुस्कुराना है यही तो जिंदगी का नाम है ... आप भी मजा लीजिये इस दर्द भरी दास्ताँ का ......


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1 comment:

मोहन वशिष्‍ठ said...

बहुत बेहतरीन गीत सुनवाने के लिए धन्‍यवाद